
तुम्हारी ओर से हाँ में इशारा चाहता हूँ मैं
भुला दो तुम गिले शिकवे सहारा चाहता हूँ मैं
मैं ख़ुद से ही न मिल पाया तुम्हें खो कर मेरे हमदम
तुम्हें पाकर नहीं खोना दुबारा चाहता हूँ मैं
— shivanshu mishra Rochak
Shers of ishaara.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling