मोहब्बत जिस सेे करते हैं ख़ुदा का मान देते हैं
ख़ुदा के इक इशारे पर हम अपनी जान देते हैं
तुम्हारी हमपे चलती है तो है सब कुछ सर आँखों पर
इधर तुम बोलते हो जाँ उधर हम जान देते हैं
जो पहले छीन लेते हैं हमारी रौशनी हम से
चराग़ आकर वही तशहीर के दौरान देते हैं
बस इक थप्पड़ सज़ा है दोस्त उसको चूमने की सो
हुई ग़लती का हम भी रोज़ ही भुगतान देते हैं
किया है 'इश्क़ तो इस
में मुनाफ़ा क्या ख़सारा क्या
फ़क़त हम तो इसे ईनाम का उन्वान देते हैं
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