सच यही है रब्त में सारी ख़ता बस थी हमारी
यार ने यूँ ही नहीं तलवार सीने में उतारी
दे दिए सब हक़ उसे मैंने बिना सोचे नतीजा
और वो समझे मिरी मासूमियत को बे-क़रारी
आरज़ू बस जिस्म की होती अगर मैं खुल के कहती
पर मुझे तो आ रही थी रास यारो दिल-फ़िगारी
और फिर वो हो गया जिस बात का था ख़ौफ़ मुझको
यार ने धीरे से कर दी नस्ब सीने में कटारी
जो हुआ जैसे हुआ सोचा हुआ था खेल सारा
एक पल में बस सनम ने तोड़ डाली सब ख़ुमारी
— Rubball















