हर इक शय में वो तुझ को देखता है
इलाही क्या वो लड़का बावरा है
उसे दीवानगी है क़ैस की सी
तपे सहरा में 'लैला' चीखता है
उखड़ती जा रही है साँस उस की
ज़बाँ से नाम तेरा बोलता है
— Sameer Goyal
इलाही क्या वो लड़का बावरा है
उसे दीवानगी है क़ैस की सी
तपे सहरा में 'लैला' चीखता है
उखड़ती जा रही है साँस उस की
ज़बाँ से नाम तेरा बोलता है
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