अब दाद किससे पाऊँगा मैं चार साल बाद
ग़ज़लें किसे सुनाऊँगा मैं चार साल बाद
वो मुझसे इतना कह के सफ़र पर निकल गया
सुन तुझसे मिलने आऊँगा मैं चार साल बाद
ज़ानू पे सर को ख़म किए कहता है ये कोई
तुमको न भूल पाऊँगा मैं चार साल बाद
मेहमान जब तलक हूँ रखो दिल में तुम मुझे
ये बस्ती छोड़ जाऊँगा मैं चार साल बाद
ये सोचकर कलेजा मेरे मुँह को आ गया
कैसे सुकून पाऊँगा मैं चार साल बाद
ये तो बताओ आपकी हिजरत के बाद में
किसको गले लगाऊँगा मैं चार साल बाद
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