agar jo aaj main leila ke qaryaa jaaunga | अगर जो आज मैं लैला के क़र्या जाऊँगा

  - Shajar Abbas

अगर जो आज मैं लैला के क़र्या जाऊँगा
तो जानता हूँ के पत्थर से मारा जाऊँगा

यक़ीन होने लगा अब तेरी मुहब्बत में
मैं रुसवा करके वतन से निकाला जाऊँगा

लबों पे शिकवा सजा होगा तेरी फुर्क़त का
ख़ुदा के सामने जिस दिन बुलाया जाऊँगा

लकीर हाथ की पढ़कर कहा नजूमी ने
मैं इक हसीना की चाहत में मारा जाऊँगा

वो पल हयात का सबसे हसीन पल होगा
तुम्हारा कह के मैं जिस पल पुकारा जाऊँगा

उधर उठेगी तेरी डोली तेरे आँगन से
बरा-ए-दफ़्न इधर मैं उठाया जाऊँगा

सुकून होता है हासिल शजर वहाँ जाकर
मज़ार-ए-क़ैस पे मैं फिर दुबारा जाऊँगा

  - Shajar Abbas

Shajar Shayari

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