ai monis-e-jaan hain badaa 'aalaa teraa rutba | ऐ मोनिस-ए-जाँ हैं बड़ा 'आला तेरा रूतबा

  - Shajar Abbas

ऐ मोनिस-ए-जाँ हैं बड़ा 'आला तेरा रूतबा
चू
में हैं मलाइक ने तेरे नक़्श-ए-कफ़-ए-पा

क्यूँ कर ये सुने कोई ख़याल-ए-दिल-ए-नाशाद
है बज़्म-ए-तरब जश्न-ए-चरागां यहाँ बरपा

वो किस तरह समझेंगे ये एहसास-ए-त'अल्लुक़
दिल की जगह जिन सीनो में साहब संग हो रखा

ऐ साक़ी ज़रा खोल दे ये ख़िश्त-ए-सर-ए-ख़ुम
के तिश्नालबी आज है हर दिन से रमीदा

कैस आ गए हम दोनों लो ख़ुर्शीद-ए-लब-ए-बाम
लैला के लब-ए-ख़ंद पा सहरा में है नगमा

लग जायेगी कश्ती-ए-मोहब्बत लब-ए-साहिल
इमदाद को गर आपने मजनू को पुकारा

ये गुंचा-ओ-गुल नदियां शजर झीलें समंद
सब शान में महबूब की पढ़ते हैं कसीदा

लगती है कू-ए-ख़ुल्द मुझे कू-ए-ख़राबात
रिज़वान-ए-जिना से ये शजर करता है शिकवा

  - Shajar Abbas

Aashiq Shayari

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