दावे करता है मेरे बारे में सब जानता है
तो बता क्या मेरे रोने का सबब जानता है
दर्द-ए-दिल दर्द-ए-जिगर मेरा हक़ीक़त में मियाँ
या तो जानू हूँ मैं या फिर मेरा रब जानता है
इतना नादान नहीं हैं दिल-ए-नादान मेरा
ये तेरा चेहरा तेरा लहजा-ओ-लब जानता है।
क्यूँ नहीं देता मेरे दिल को तू बा-वक़्त गिज़ा
ऐ बशर तू तो मेरे दिल की तलब जानता है।
इसका नाता है किसी अच्छे क़बीले से शजर
इसलिए लड़का ये तहज़ीब-ओ-अदब जानता है
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