kar raha hai dil miraa bas ye aarzoo dekho | कर रहा है दिल मेरा बस ये आरज़ू देखो

  - Shajar Abbas

कर रहा है दिल मेरा बस ये आरज़ू देखो
ऐ सुकून-ए-जान-ओ-दिल मेरे रु-ब-रु देखो

बोसा लेके माथे का तैश से कहा उसने
इस तरह से करते हैं ज़ख़्म-ए-दिल रफ़ू देखो

लौट आ ख़ुदारा तू भूल के ख़ता मेरी
ये सदाएँ देती है अब भी आरज़ू देखो

वो ख़ुदा की आयत है और ये जहाँ वाले
नाम उसका लेते हैं तौबा बिन वज़ू देखो

जिन
में ख़्वाब रहते थे वस्ल-ए-यार के हरदम
रो रहीं हैं वो आँखें हिज्र में लहू देखो

जिस निगाह-ए-उल्फ़त से देखती हो दुनिया को
उस निगाह-ए-उल्फ़त से मुझको भी कभू देखो

एक लड़की गुलशन में यार शाम को आकर
तितलियों से करती है रोज़ गुफ़्तुगू देखो

हैफ़ मुझको होता है चंद सिक्कों के बदले
लोग बेच देते हैं अपनी आबरू देखो

कर गया है ज़ख़्मों से जो मिरा जिगर छलनी
कर रहा हूँ मैं फिर से उसकी जुस्तजू देखो

जो क़रीब थे दिल के कल तलक 'शजर ज़ैदी'
आज बन गए हैं वो सब के सब अदू देखो

  - Shajar Abbas

Hijrat Shayari

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