दिल तो नहीं करता है शजर छोड़ रहे हैं
मजबूर हैं मजबूरी में घर छोड़ रहे हैं
ता 'उम्र न उतरेगा नशा आपके सर से
हम आपके चेहरे पे नज़र छोड़ रहे हैं
दिल अब न चुरेगा कोई उल्फ़त केे शहर में
हम दिल को चुराने का हुनर छोड़ रहे हैं
मंज़िल नहीं आती है नज़र हमको हमारी
हम बीच में यूँँ अपना सफ़र छोड़ रहे हैं
अब ज़ब्त नहीं बाक़ी समर को रखें ख़ुद पर
ये कह केे शजर अपना समर छोड़ रहे हैं
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