haal paagal sa meraa dekh ke haara paagal | हाल पागल सा मेरा देख के हारा पागल

  - Shajar Abbas

हाल पागल सा मेरा देख के हारा पागल
एक पागल ने मुझे कह के पुकारा पागल

दिल लगी मैं किसी पागल से नहीं कर सकती
क्या कहा फिर से ज़रा कहना दुबारा पागल

एक पागल की है आग़ोश में सर पागल का
देख पागल से ये कहता है नज़ारा पागल

इल्तिजा है मेरी तुम बर-सर-ए-महफ़िल मुझको
पागलों जैसा नहीं करना इशारा पागल

अब से पहले सुनो पागल ये मेरा हाल न था
हाल फ़ुर्क़त ने किया है ये हमारा पागल

एक पागल ने बिछड़ते हुए पागल से कहा
बिन तेरे मेरा नहीं होगा गुज़ारा पागल

अर्श से फ़र्श तलक देख लिया सारा जहाँ
बा-ख़ुदा तुमसा नहीं है कोई प्यारा पागल

या तो अपना लो मुझे या मेरी बन जाओ तुम
अब नहीं इसके अलावा कोई चारा पागल

पत्तियाँ चूम के जब गुल की हटा गुल ने कहा
चूम लो आज मुझे सारे का सारा पागल

आओ तुम जान-ए-वफ़ा इसकी अयादत के लिए
हो गया है ये शजर देखो तुम्हारा पागल

  - Shajar Abbas

Nazara Shayari

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