जानता हूँ मैं मेरे मरने पे क्या क्या होगा
क़हक़हे होंगे कहीं और कहीं गिर्या होगा
ख़ाक को ख़ाक-ए-शिफ़ा तेरी बनाएँगे हुसैन
ख़ाक पे करबोबला जब तेरी सज्दा होगा
मात खा जाएँगे ज़ालिम ये सभी तीर-ओ-कमाँ
यौम-ए-आशूर तबस्सुम से वो हमला होगा
हर कोई हिज्र का मारा मेरे मानिंद शजर
एड़ियाँ ख़ाक के बिस्तर पे रगड़ता होगा
हर घड़ी है लब-ए-लैला पे शजर ये नौहा
क़ैस सहरा में मेरा तन्हा भटकता होगा
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Shajar Abbas
our suggestion based on Shajar Abbas
As you were reading Breakup Shayari Shayari