जो तिरा ख़्वाब है वो ख़्वाब हक़ीक़त कर ले
मशवरा मान मिरा मुझसे मुहब्बत कर ले
अपने हाथों से कफ़न चेहरे से सरका मेरे
आख़िरी बार ले चेहरे की ज़ियारत कर ले
छोड़कर जब ये चले जाएँगे पछताएगा
हैं जो ज़िंदा तिरे माँ बाप तो ख़िदमत कर ले
रोज़-ए-महशर ये तिरे काम नहीं आएगी
चाहे जितनी भी जमा पास तू दौलत कर ले
गर तमन्ना है तिरे दिल में जिनाँ की आ फिर
नाम की उसके शजर बैठ तिलावत कर ले
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Shajar Abbas
our suggestion based on Shajar Abbas
As you were reading Mohabbat Shayari Shayari