कारनामा आज की शब ये 'अजब हमने किया
गुल की ख़ातिर गुल चमन से मुंतख़ब हमने किया
'इश्क़ की आयत पढ़ी हमने फ़राज़-ए-दार पर
मौत का कब ख़ौफ़ बतला कम-नसब हमने किया
दिल का हर गोशा चराग़-ए-इश्क़ से रौशन करो
दार से ऐलान ये फ़ुर्क़त की शब हमने किया
था बड़ा मंज़र 'अजब वो 'इश्क़ के मैदान में
हुस्न से माल-ए-ग़नीमत जब तलब हमने किया
दिल ही दिल में हमको दिल ने दिल से दी हँसकर दुआ
जब बुज़ुर्गों का शजर दिल से अदब हमने किया
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