kisi kii yaad men mat baith aankhen nam kar ke | किसी की याद में मत बैठ आँखें नम कर के

  - Shajar Abbas

किसी की याद में मत बैठ आँखें नम कर के
किसी को कुछ नहीं मिलता किसी का ग़म कर के

तिरे मज़ार की चौखट पे सर को ख़म कर के
सुकूँ से बैठे हैं हम दर्द-ए-दिल को कम कर के

तमाम 'उम्र अलम करते हम बिछड़ने का
अगरचे फ़ायदा मिलता कोई अलम कर के

हमें मलाल नहीं दिल के टूट जाने का
अगर सुकून मिले आपको सितम कर के

अजीब शख़्स है कितना अजीब देखो तो
सनम को भूल गया है तुम्हें सनम कर के

  - Shajar Abbas

Jafa Shayari

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