kiya hai chaand ne mere singaar eed ke din | किया है चाँद ने मेरे सिंगार ईद के दिन

  - Shajar Abbas

किया है चाँद ने मेरे सिंगार ईद के दिन
ख़िज़ा पे आ गई देखो बहार ईद के दिन

मता-ए-जान क़सम से तेरी ज़ियारत को
निगाह-ए-दिल था मेरा बेक़रार ईद के दिन

फक़त तुम्हारी कमी खल रही थी रह रह कर
जमा थे घर पे सभी रिश्तेदार ईद के दिन

सदाएँ देता रहा दिल धड़क धड़क के तुम्हें
निगाहें करती रहीं इंतिज़ार ईद के दिन

पराए देस में तन्हाई से गले मिलकर
शजर मैं रोता था ज़ार-ओ-क़तार ईद के दिन


शजर लो माथे का बोसा मेरे लगाओ गले

वो मुझ सेे कहता रहा बार बार ईद के दिन

  - Shajar Abbas

Tanhai Shayari

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