अगर हमसे मोहब्बत में शरारत हो गई तो फिर
हमें गर रोज़ मिलने की ये आदत हो गई तो फिर
अभी हम साथ हैं इक दूसरे के ख़ुश हैं हर लम्हा
अगर कल दरमियाँ में अपने फुर्क़त हो गई तो फिर
मोहब्बत तुम इबादत की तरह करते हो कसरत से
मोहब्बत में अगर मुझसे सियासत हो गई तो फिर
तुम्हारे ख़्वाब सब मेरी इन आँखों में अमानत हैं
बताओ गर अमानत में ख़यानत हो गई तो फिर
मैं तुमसे दोस्ती कर लूँगी लेकिन दोस्ती के बाद
अगर मुझको शजर तुमसे मोहब्बत हो गई तो फिर
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