दामन भिगोए अश्कों से पलकों को नम करे
लाज़िम है उस पे मुझ से बिछड़ने का ग़म करे
हाकिम है सल्तनत का उसे इख़्तियार है
बोसा जबीं का ले या मिरा सर क़लम करे
उसने बिछड़ते वक़्त हमें दी थी ये दुआ
परवरदिगार आप पे रहम-ओ-करम करे
उस से कहो के मुझ पे घड़ी इम्तिहाँ की है
वो आ के मुझ पे सूरा-ए-यासीन दम करे
जैसे सितम तू 'इश्क़ में करता है रब करे
वैसे ही कोई 'इश्क़ में तुझ पर सितम करे
परवरदिगार तुझ से दुआ है सदा शजर
अपने क़बीले वालों का ऊँचा अलम करे
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