pal bhar sukoon-e-dil nahin paaya hayaat men | पल भर सुकून-ए-दिल नहीं पाया हयात में

  - Shajar Abbas

पल भर सुकून-ए-दिल नहीं पाया हयात में
गुज़री है कुल हयात मेरी मुश्किलात में

तश्ना लबों से अब नहीं उलझेगी हश्र तक
प्यासों का इतना ख़ौफ़ है ज़हन-ए-फ़ुरात में

हम नाम तेरे सैकड़ो दुनिया में मिल गए
हम शक्ल तेरा कोई नहीं काएनात में

बरपा हुआ ये 'इश्क़ के मक़तल में शोर-ओ-ग़ुल
मारे गए लो हज़रत-ए-दिल हादसात में

वैसे तो अन-गिनत हैं मेरी ख़्वाहिशें शजर
पर सबसे पहले तुम हो मेरी ख़्वाहिशात में

  - Shajar Abbas

Life Shayari

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