tabdeel itnaa meraa ik yaar ho gaya hai | तब्दील इतना मेरा इक यार हो गया है

  - Shajar Abbas

तब्दील इतना मेरा इक यार हो गया है
नाज़ुक सा एक गुल था अब ख़ार हो गया है

ख़ुद कामयाबी आई छूने को पैर उसके
जो बंदा वक़्त रहते बेदार हो गया है

ये बात सच है उसका दीवाना हो गया वो
इक बार उसका जिसको दीदार हो गया है

करते हैं इल्तिजा हम रुख़ से हटा दो पर्दा
मौला हमारा जीना दुश्वार हो गया है

ये तीर-ए-इश्क़ देखो अहल-ए-नज़र शजर के
इस पार से जिगर के उस पार हो गया है

  - Shajar Abbas

Deedar Shayari

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