udaasiyon ke samandar ko paar karte hue | उदासियों के समंदर को पार करते हुए

  - Shajar Abbas

उदासियों के समंदर को पार करते हुए
वो डर रहा था बहुत आँखें चार करते हुए

मैं अपनी आँखों की बीनाई को न खो दूँ कहीं
ऐ आने वाले तेरा इंतज़ार करते हुए

हाँ अपने बच्चों की दो वक़्त की गिज़ा के लिए
फिरे है जिस्म का वो कारोबार करते हुए

तू इंतिशार में इक रोज़ मारा जायेगा
ये बात जान ले तू इंतिशार करते हुए

क़सम से जब से मेरा ऐतबार टूटा है
शजर में डरता हूँ अब ऐतबार करते हुए

  - Shajar Abbas

Breakup Shayari

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