उनसे नज़रों को मिलाने में मज़ा आता है
फिर मिलाकर के चुराने में मज़ा आता है
उसके अख़लाक व लहजे की नज़ाकत पे मुझे
गज़लें लिखने में सुनाने में मज़ा आता है
जब भी आ जाती है वो लड़की तसव्वुर में मेरे
उसकी तस्वीर बनाने में मज़ा आता है
दुनिया वाले नये घर चाहते हैं शिद्दत से
और हमें अपने पुराने में मज़ा आता है
जाने क्या बात है उस पेड़ की शाखों में शजर
उसको सीने से लगाने में मज़ा आता है
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