ye sun ke chauk gaya baat aaj yaar meraa | ये सुन के चौक गया बात आज यार मेरा

  - Shajar Abbas

ये सुन के चौक गया बात आज यार मेरा
नहीं हैं जिस्म से खिलवाड़ कारोबार मेरा

अब इससे ज़्यादा तुझे और क्या लिखूँ जानाँ
है अश्क़ बारी तेरे बाद रोज़गार मेरा

इक इल्तिजा है मेरी बाद मेरे मरने के
कराना सहरा में तामीर तुम मज़ार मेरा

मैं जिसको जान से ज़्यादा अज़ीज़ रखता था
उसी ने तोड़ दिया हाए ऐतबार मेरा

मैं जब तलक न पलटता था घर को दफ़्तर से
वो दर पे बैठ के करती थी इंतिज़ार मेरा

  - Shajar Abbas

Dar Shayari

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