"याद"
ग़मों का राग सदा ज़िंदगी सुनाएगी
हर एक गाम पे माज़ी की याद आएगी
न माँगो ऐसे दुआ रब से ज़िंदगी के लिए
हमारे बा'द तरस जाओगे ख़ुशी के लिए
हमारी याद तुम्हें उम्र भर रुलाएगी
बिछड़ के हम से तुम्हारे हसीन होंठो का
तवाफ़ करने तबस्सुम कभी न आएगा
तुम्हारे हाल का ग़म बेबसी मनाएगी
ज़मीन-ए-दिल पे मुहब्बत के फूल ऐ हमदम
तमाम उम्र करेंगे फ़िराक़ का मातम
ग़मों का राग ये बाद-ए-सबा सुनाएगी
— Shajar Abbas















