आतिश-ए-इश्क़ में जब क़ल्ब-ए-शजर जलने लगाहर कोई अहल-ए-नज़र दस्त-ए-अदब मलने लगामक़सद-ए-हज़रत-ए-राँझा की हिफाज़त के लिएराह-ए-उल्फ़त पे मैं बे-खौफ़-ओ-ख़तर चलने लगा— Shajar Abbas