दामन-ए-दिल से शजर साफ़ लहू कर लेनाबा'द में दामन-ए-दिल अपना रफ़ू कर लेनाजब जुदाई के मुसल्ले पे रखो पैरों कोआप तब अश्क-ए-निदामत से वुज़ू कर लेना— Shajar Abbas