फ़रिश्तों को अगर मेरी तरह उसकी ज़ियारत हो
फ़रिश्तों पर ये लाज़िम है फ़रिश्तों को भी हैरत हो
मुहब्बत हो वफ़ा हो इंकिसारी हो शराफ़त हो
हो चेहरा साँवला चाहे मगर दिल ख़ूबसूरत हो
तू मेरे दर्द को समझे तू उसके हाल पर रोए
तिरे बेटे को भी इक शाहज़ादी से मुहब्बत हो
मुहब्बत में 'अजब से मोड़ पर आकर खड़े हैं हम
उन्हें हमसे शिकायत है हमें उन से शिकायत हो
तिरे कूचे में तेरे दर के आगे हो मिरा मदफ़न
दुआ गो हूँ ख़ुदा से मैं मिरी पूरी ये हसरत हो
तुम्हें देखूँ तुम्हें चूमूँ तुम्हें चूमूँ या मैं देखूँ
मिरी मर्ज़ी है चुप बैठो कि तुम मेरी अमानत हो
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