मैं ज़िंदगी पे ग़ज़ल इस तरह बनाऊँगा
हर एक दर्द ज़माने का गुनगुनाऊँगा
तुम्हें ये जान के अच्छा लगेगा मेरी माँ
वतन की शान को मैं मर के भी बचाऊँगा
ये चाँद तारे मेरे घर को क्यूँ करें रौशन?
मैं ख़ुद चराग़ यहाँ बन के जगमगाऊँगा
— Manoj Sharma "Chandan"
हर एक दर्द ज़माने का गुनगुनाऊँगा
तुम्हें ये जान के अच्छा लगेगा मेरी माँ
वतन की शान को मैं मर के भी बचाऊँगा
ये चाँद तारे मेरे घर को क्यूँ करें रौशन?
मैं ख़ुद चराग़ यहाँ बन के जगमगाऊँगा
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