कुछ दिनों से अजब ख़ुमारी है
हो न हो हम पे हुस्न तारी है
अंजुमन के उदास लोगों से
आज कल दोस्ती हमारी है
जिस्म ने तो निकाह कर ली पर
रूह अब भी मेरी कुँवारी है
सादगी और हुस्न वालों में
हुस्न वालों का इश्क़ भारी है
तू ने आख़िर चुना भी तो उस को
जो तेरे जिस्म का पुजारी है
— Shekhar Mandal















