"वो सच में ख़ुश है तो कोई बात नहीं"
वो सच में ख़ुश है तो कोई बात नहीं
जिस भी घर में जिस भी दिल में हो ख़ुश हो
उस को ख़ुश भी न देखूँ ऐसी सिफ़ात नहीं
लेकिन दिल से उस को भुलाने से पहले
यादों का ये जज़ीरा तोड़ने से पहले
मैं कुछ देर सलीक़े से जाँ रो तो लूँ
दिल पे लगा जो रंग मलाल का धो तो लूँ
अब से रोग नहीं ऐ दिल कुछ जोग नहीं
यार के जाने का ऐ दिल कुछ सोग नहीं
एक ही शख़्स नहीं दुनिया में मतवाले
मंज़िल और भी है दूसरे मंज़िल को देख
एक किनारा छूट गया तो क्या ही हुआ
साहिल और भी है दूसरे साहिल को देख
तेरे साथ जो औरों को भी रुला ही दे
अब ऐसी हसरत का दीप बुझा ही दे
दर्द-नुमा दिल छोड़ आ उस के आंगन में
ऐ ना-शाद मुसाफ़िर झूम आ सावन में
अब से रोग नहीं ऐ दिल कुछ जोग नहीं
यार के जाने का ऐ दिल कुछ सोग नहीं
वो सच में ख़ुश है तो कोई बात नहीं















