hai nazaron ki khaatir vaba teri soorat | है नज़रों की ख़ातिर वबा तेरी सूरत

  - SHIV SAFAR

है नज़रों की ख़ातिर वबा तेरी सूरत
मैं फिर भी तकूँ हर दफ़ा तेरी सूरत

तुझे देख कर मन्नतें होती पूरी
है मेरे लिए इक दुआ तेरी सूरत

तुझे मेरा करके वो पछता रहा है
कि रब के लिए है ख़ता तेरी सूरत

तेरी आब से तारे भी जल रहे हैैं
बनी चाँद ख़ातिर बला तेरी सूरत

बड़ी ही नज़ाकत से दुल्हन के जैसे
सँभाले हुए है हया तेरी सूरत

जिसे ओढ़ कर पाया मैंने सुकूँ वो
है आँखों का मेरे क़बा तेरी सूरत

  - SHIV SAFAR

Andaaz Shayari

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