jise samajh raha tha main ki vo meraa habeeb tha | जिसे समझ रहा था मैं कि वो मेरा हबीब था

  - SHIV SAFAR

जिसे समझ रहा था मैं कि वो मेरा हबीब था
यक़ीन के नक़ाब में वो अस्ल में रक़ीब था

मुझे कभी मिली नहीं ख़ुशी किसी के साथ की
करूँँॅं भला गिला मैं क्यूँँ अगर यही नसीब था

जो मुफ़लिसी में मर गया इलाज़ के बग़ैर ही
मेरे क़दीम मर्ज़ का वही तो इक तबीब था

कभी समझ नहीं सका मैं 'इश्क़ की वो साजिशें
'अजीब थी वफ़ा तेरी वो साथ भी 'अजीब था

बना लिया हूँँ ख़ुद को अब गलीज़ तेरी चाह में
नहीं तो शाही ख़ून का मैं भी कभी नज़ीब था

ज़माने की नज़र में था जो कुफ़्र से भरा हुआ
मेरे दिल-ए-मज़ार पे वो 'इश्क़ का ख़तीब था

  - SHIV SAFAR

Aarzoo Shayari

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