vo janjaal ab bhi hai waisa ka waisa | वो जंजाल अब भी है वैसा का वैसा

  - SHIV SAFAR

वो जंजाल अब भी है वैसा का वैसा
मेरा हाल अब भी है वैसा का वैसा

कि बीता दिसंबर चली जनवरी फिर
मगर साल अब भी है वैसा का वैसा

तमाचा जो मारा था तुमने दग़ा का
मेरा गाल अब भी है वैसा का वैसा

बुलाने में तुझको जो लब पे पड़े थे
वो तबख़ाल अब भी है वैसा का वैसा

जो तकिए तले ले के सोता हूँ अक्सर
वो तिम्साल अब भी है वैसा का वैसा

वो उलझन वो तड़पन वो दर्द ओ सितम सब
बहर–हाल अब भी है वैसा का वैसा

  - SHIV SAFAR

Zulm Shayari

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