“जन्म-दिन”

ज़िंदगी का हर इक दिन हँसाता रहे
जन्म-दिन आप का रोज़ आता रहे

चाँद तारों के गुब्बारे कमरे में हो
सब हक़ीक़त बने जो भी सपने में हो
काटना केक अपने ग़मों का बना
फ़िक्र की मोमबत्ती को भी फूँकना
आसमाँ से फ़रिश्ते, परी आएँगे
ख़ूब भर भर के वो तोहफ़े भी लाएँगे
फिर बजाएँगे मिल कर सभी तालियाँ
गाएँगे जुगनुएँ नाचेंगी तितलियाँ

फूलों के जैसे मन मुस्कुराता रहे
जन्म-दिन आप का रोज़ आता रहे

— SHIV SAFAR

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