“मौसम ये बरसात का”

आसमाँ से ज़मीं की मुलाक़ात का
देखो आया है मौसम ये बरसात का

नन्हें बच्चों के पैरों की छप छप कभी
तो कभी गिरती बूॅंदों की टप टप कहीं
देख कर ये अनोखा नज़ारा यहाँ
आज झूमा न हो ऐसा कोई नहीं
गीली मिट्टी की ख़ुशबू लिए अपने संग
दिन भी आया है ख़ुशियों के सौगात का
आसमाँ से ज़मीं की मुलाक़ात का
देखो आया है मौसम ये बरसात का

बादलों में झगड़ती हुई बिजलियाँ
ये फुहारे हैं उड़ती हुई तितलियाँ
आज धरती को बूँदें हैं यूँॅं छू रही
मानो करती हो अंबर की कुछ चुगलियाँ
छाया है अब कहीं पर ख़ुशी का समाँ
तो कहीं पर है माहौल आपात का
आसमाँ से ज़मीं की मुलाक़ात का
देखो आया है मौसम ये बरसात का

— SHIV SAFAR

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