दिल में यूँँ इक पीर छिपाए बैठा हूॅं
जैसे इक जागीर छिपाए बैठा हूॅं
बच्चों की मुठ्ठी में गुड़ के जैसे ही
मैं उसकी तस्वीर छिपाए बैठा हूॅं
मैं ख़ामोश हूॅं यानी अपने सीने में
बात कोई गंभीर छिपाए बैठा हूॅं
राँझा नाम से फोन में रखके इक नंबर
मैं भी अपनी हीर छिपाए बैठा हूॅं
माँ का साया उठ जाने के बाद अपनी
रब से भी तक़दीर छिपाए बैठा हूॅं
उसकी ख़िदमत में पहने इस चोग़े से
पैरों की ज़ंजीर छिपाए बैठा हूॅं
सुब्ह हुई पर आँख नहीं खोली यानी
ख़्वाबों की ताबीर छिपाए बैठा हूॅं
हर इक पर है नक़्श मेरे ही अपनों का
दिल में जितने तीर छिपाए बैठा हूॅं
झूठ सफ़र है अस्ल तो अपने शे'रों में
ग़ालिब मोमिन मीर छिपाए बैठा हूॅं
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