बारिशों में नेत्र विह्वल हो रहे हैंप्रेम के अब मेघ श्यामल हो रहे हैंदिन-ब-दिन तुम ख़ूब-सूरत हो रही होदिन ब दिन हम और पागल हो रहे हैं— Shobhit Dixit