
किसी को क्यूँ दिखाते हो अभी अंदाज़ नफ़रत के
यहाँ पर गुल खिले है जब मिरे जानाँ मोहब्बत के
अगर ढूँढो तो मिल जाए ख़ुदा भी अब किताबों में
किताबों में नहीं मिलते यहाँ बस राज़ उल्फ़त के
— Sandeep Rajput
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