din hone se pahle pahle pahuncha karta tha | दिन होने से पहले पहले, पहुँचा करता था

  - BR SUDHAKAR

दिन होने से पहले पहले, पहुँचा करता था
उस सेे मिलने, मैं उस के कॉलेज जाया करता था

देख उसे, अल्लाह ही जाने क्या होता था मुझे
सांसे रुक जाती थी, फिर दिल धड़का करता था

झगड़ा कर के मुझ सेे, जब वो रूठा करती थी
तब उसके बस्ते में, मैं फूल छिपाया करता था

वो इस इक ख़ातिर अपनी ज़ुल्फ़ों को गिरा देती
मैं अपने हाथों से ज़ुल्फ हटाया करता था

वो लड़की सहरा पर पानी भरने जाती थी
देख उसे सहरा, दरिया बन जाया करता था

रात मेरे ख़्वाबों में इक एंजल आती थी और
मैं उस के बालो में फूल लगाया करता था

अच्छा लगता था यस, नो, सॉरी कहना उसका
कोई था जो इतनी बात बनाया करता था

इक वो रस्ता मैं तब भी और अब भी न भूला हूँ
जिस रस्ते से मैं यूँं तन्हा आया करता था

  - BR SUDHAKAR

Fasad Shayari

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