तन्हाई में छुपे बच्चों ने चूम लिया
बल्ब बुझाया और कमरों ने चूम लिया
इतनी हिम्मत थी रख दी उँगली उस पार
और मज़ा ये था लहरों ने चूम लिया
उस की निगाह-ए-नाज़ है रहमत का जादू
मुफ़्लिस का बिस्तर ख़्वाबों ने चूम लिया
मेरे पास सँवरने आया था मंज़र
जुज़ मेरे पर सब आँखों ने चूम लिया
पाज़ेब-ए-दिलबर की धुन में गुम थे हम
बेड़ी जो खनकी पैरों ने चूम लिया
सैर-ए-मक़्तल में दौरान-ए-ज़िक्र-ए-हयात
अँगड़ाई क्या ली लाशों ने चूम लिया
— khamakhaah















