तेरे इश्क़ की इंतिहा माँगता हूँ
भला तुझ से मैं और क्या माँगता हूँ
सितम था तड़पते रहा मैं अकेला
कि अब मेरे हिस्से ख़ुदा माँगता हूँ
भरी बज़्म में राज़ की बात कह दूँ
तमाशा खड़ा हो वफ़ा माँगता हूँ
ये जन्नत ये दोज़ख़ ख़फ़ा मुझ से यूँ है
मोहब्बत न तेरे सिवा माँगता हूँ
जफ़ा बद-दुआ है, वफ़ा ज़िंदगी है
मुझे ज़िंदगी दे, दुआ माँगता हूँ
— Mohammad Talib Ansari















