हिज्र में तेरे गुज़ारा किस तरह हो
'इश्क़ भी तुझ सेे दोबारा किस तरह हो
किसके चक्कर में पड़े हो यार तुम भी
जो न था मेरा तुम्हारा किस तरह हो
सोचता हूँ भूल जाना लाज़मी है
तेरी आदत से किनारा किस तरह हो
लौट कर आने की गुंजाइश कहाँ है
क्या पता तुमने पुकारा किस तरह हो
तेरी आँखों की ख़ुमारी यूँँ चढ़ी है
सोचता हूँ अब उतारा किस तरह हो
तैरना तिनके को ख़ुद आता नहीं है
डूबते का वो सहारा किस तरह हो
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