पुराने ज़ख़्म को ज़िन्दा न कर बैठे
किसी के साथ में रिश्ता न कर बैठे
मुझे मेरी तरह का चाहिए दुश्मन
अना के साथ समझौता न कर बैठे
हया अच्छी मगर इतनी नहीं साहब
मुझे ही देखकर पर्दा न कर बैठे
हुनर है एक ही ग़म बाँटने का बस
मुहब्बत फिर हमें तन्हा न कर बैठे
बला लेकर 'तिवारी' घूमता है जाँ
हमारा जोश वो ठंडा न कर बैठे
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