बड़ा रहता है फ़ुरसत में ज़माना
नहीं दिखता ज़रूरत में ज़माना
है जिनको इल्म दो आलम का उनकी
नहीं होता है क़िस्मत में ज़माना
किसी के गुलनुमा आरिज़ पे पिम्पल
है ऐसा ही मुहब्बत में ज़माना
बुराई का कोई फारम निकालो
लिखूँ ख़ाना-ए-लानत में ज़माना
कि वो दोना वहाँ क्या कर रहे थे
मरा जाता है रग़बत में ज़माना
फ़रेबी चोर धोकेबाज़ मक्कार
इन्हें कहते हैं वुसअत में ज़माना
असद तुम पर किताबी ज्ञान है बस
कभी देखो हक़ीकत में ज़माना
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