kisi aur ko jab pukaara gaya | किसी और को जब पुकारा गया

  - Asad Akbarabadi

किसी और को जब पुकारा गया
तो यानी हमारा इजारा गया

अना ने कहा अब नहीं तो नहीं
मगर दिल तो दिल था दुबारा गया

हमीं थे जो सीने से लग कर रहे
सो ग़ुस्सा हमीं पर उतारा गया

वो एक एक लम्हा शबे-हिज्र का
गुज़रता नहीं था गुज़ारा गया

मुझे ये ख़ुशी है कि वो बच गए
उन्हें ये ख़ुशी है मैं मारा गया

बढ़ा भाव बाज़ार में दर्द का
सो ज़ख़्मों को ख़ुद ही उभारा गया

ये शम्सो-क़मर बे-तजल्ली लगें
कि जब माँ की आँखों का तारा गया

यही बात कहते रहे तजरबे
भँवर देख प्यारे किनारा गया

ख़लिश घाव धोके हैं लालो-गुहर
इन्हीं से ग़ज़ल को सँवारा गया

लबों पर लटों पर तिलों पर कलाम
लो देखो 'असद' भी बिचारा गया

  - Asad Akbarabadi

Beqarari Shayari

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