ले आया हूँ मैंॅं दिल शीशे पे रख के
ये धड़केगा तेरे सीने पे रख के
वो जागी रात ख़ुद गीले में लेकिन
सुलाती थी हमें सूखे पे रख के
ये आदत जान ले लेगी किसी दिन
नहीं सोते यूँ सिर कांधे पे रख के
नहीं बिकते यूँ ही टूटे खिलौने
सो दिल बेचा बहुत सस्ते पे रख के
तुम्हारे लब की कड़वाहट मिटा दूँ
कि देखो होंठ इस माथे पे रख के
— Vishal Rana















