सारे पेड़ जला दो जिन से हवा लगे अफ़्सानों को

इक दीवार बनाओ उस
में चुन दो सब दीवानों को

अगर फ़रिश्ते भी आ जाए उन के संग न जाए वो
जिस को लाने राजा तू ने भेजा है दरबानों को

प्यार ने मुझ को दर्द दिया है वहशत दी और फुरक़त दी
तिरे पीर ने मेरे ऊपर छोड़ दिया शैतानों को

इतनी छोटी सी हरकत पर कितना वो शरमाई है
बाली पहनाते पहनाते चूम लिया था कानों को

फिर देखूँ मेरे आगे किस की सेना टिक पाती है
अभी पेड़ से अगर उतारूँ अपने तीर कमानों को

— Vishnu virat

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