"गिला"
मुझे याद कर या मुझे भूल जा
मुझे तुझ से इस का गिला नहीं
तू मिला नहीं तो फिर क्या हुआ
मुझे ख़ुद को मैं भी मिला नहीं
मेरी वहशतों में ख़याल है
मेरा इश्क़ इश्क़-ए-मलाल है
मेरी जान तेरा जो हिज्र है
ख़ुदा क़सम ये बवाल है
मुझे दुख है के तू क़रीब था
फिर क़रीब क्यूँ तू रहा नहीं
मैं ने माना मैं ही ख़राब था
मेरी रूह पे तारी अज़ाब था
मेरे वास्ते जो तेरे दिल में था
तू ने क्यूँ वो मुझ से कहा नहीं
तुझे मुझ से गर ज़रा भी प्यार था
तू ने क्यूँ फिर मुझ को सहा नहीं
कभी लौट आ कोई बात कर
जो गुज़र गया उसे याद कर
मेरे हाल का कर तब्सिरा
मेरे ग़म पे आ कर मलाल कर
मैं बताऊँ तू ने था क्या किया
तू ने मेरे दिल को ज़िबाह किया
तू ने मेरी दुनिया उजाड़ कर
तू ने दिल किसी से लगा लिया
ये जो अहद ए तर्क-ए-वफा किया
तू ने इश्क़ में ये गुनाह किया
तू ने मुझ को को ख़ाक बना दिया
तू ने सब हवा में उड़ा दिया
तू ने कैसे मुझ को भुला दिया
मैं तो तुझ को अब तक भूला नहीं
तू मेरा नहीं कुछ गिला नहीं
ये बता दे क्या मैं तेरा नहीं















