"कमाल हो तुम"

मैं नहीं जानता कौन हो तुम
पर जो भी हो कमाल हो तुम
तुम्हें देख कर जो दौड़ती है रगों में ख़ुशी
तुम्हें देख कर भूल जाता हूँ दुनिया कि सारी उदासी

चाँद तारों झील दरिया ख़ुशबू फूल बारिश
बादल से परे है और ख़ुदा से जो अता है
वो सब से नायाब तोहफ़ा हो तुम

कोई आभा जो तुम्हारे चेहरे पे रहती है
जहाँ के सारे रंग समेट के जो सजती है
वो फ़ज़ा का मौसम का सुनहरा ख़्वाब हो तुम

जो सुकूँ दे रूह को वो शा'इरी हो तुम
नज़र जो आए फूलों में वो ताज़गी हो तुम
जिस की आँखों में क़ायनात नज़र आ जाए
बिखरते गेसू जिस के जादू बिखरा जाए
वो हया वो हँसी वो चीज़ हो तुम

मैं नहीं जानता कौन हो तुम
पर जो भी हो कमाल हो तुम

— Karan Shukla

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