"चुप्पियाँ"

तेरी ख़ामोशियाँ तड़पाती हैं मुझे
ये उदासियाँ सताती हैं मुझे
ग़म-ए-दिल का सहारा नहीं है
अब तेरा चुप रहना गवारा नहीं है
जब तक तुझे मैं सुन सकता हूँ
तेरे अल्फ़ाज़ मैं चुन सकता हूँ
अब सीने से लगा ले मुझे
ये चुप्पियाँ मार न डाले मुझे
ये तन्हाइयाँ खलती हैं
दिल में बेचैनियाँ पलती हैं
कुछ बोल

— Vikas Sangam

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